मजबूरी का फायदा कैसे उठाया जाता है, सत्ताधारी जेडीयू विधायक के न्यूज चैनल ‘कशिश’ से सीखिए…. पटना से प्रसारित बिहार-झारखंड का रीजनल न्यूज चैनल में कर्मचारी अब इतने मजबूर हैं कि अपनी ही आवाज बुलंद नहीं कर पा रहे हैं.. इसके पीछे की वजह है सात महीने का बकाया वेतन..
कंपनी में पिछले सात महीने से वेतन नहीं दिया गया गया है.. जाहिर है आज कर्मचारियों की स्थिति यह है कि कोरोना काल में एक एक पैसे को मोहताज हैं…
कंपनी के कई कर्मचारी चैनल के संपादक से लेकर मालिक तक से गुहार लगा रहे हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है…
पैसे मांगने पर चैनल के संपादक कहते हैं- पैसों की मांग मत करो, क्वारंटाइन हो जाओ…
मालिक को मैसेज या फिर फोन करने पर कोई जवाब नहीं दिया जाता है…
ऐसे में कंपनी के कर्मचारी क्या करें, किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा है…
बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं और कंपनी के मालिक को भी चुनाव लड़ना है.. लिहाजा अब संपादक की तरफ से कहा जा रहा है कि चैनल में कोई दूसरा इनवेस्टर आ रहा है.. जुलाई के बाद पैसा टाइम से दिया जाएगा…
लेकिन इसमें भी ज्यादातर कर्मचारियों को शक है कि ये सब बातें कोई नई साजिश तो नहीं… क्योंकि चैनल के मालिक किसी भी तरह चुनाव तक चैनल को जिंदा रखना चाहते हैं…..
कर्मचारी परेशान यह सोचकर भी हैं कि पिछले सात महीने के बकाये पैसों का क्या हुआ….कहने को तो चैनल के मालिक जेडीयू के विधायक हैं लेकिन सच तो यह है कि मालिक अपने ही कर्मचारियों का खून चूस रहे हैं…
कशिश न्यूज में संपादक की तानाशाही चलती है. मैनेजमेंट की नींद नहीं खुल रही है…
कशिश न्यूज के कर्मचारी बेबसी पर आज रो रहे हैं..सात महीने का वेतन फंसा हुआ है… लिहाजा कोई दूसरे संस्था में जाने की सोच भी नहीं सकता… क्योंकि यहां छोड़कर कर जाने वाले कर्मचारियों को अब पैसा नहीं दिया जाता है..
कुछ लोग कोर्ट भी गए लेकिन कोर्ट तो अमीरों के साथ है.. फिर निम्न स्तर के कर्मचारी की शिकायतों पर कब सुनवाई होगी.. भगवान जाने…
सर मैंने अपना दर्द साझा किया… खबर भेजे काफी दिन हो गए… अब तक भड़ास पर पोस्ट नहीं हुआ है…
सर खबर को लगवा दीजिए थोड़ा..शायद बेशर्म ‘कशिश’ संपादक की नींद टूट जाए…
कशिश न्यूज के एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.
सोर्स : Bhadas 4 Media
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